दोहरा लेखा प्रणाली क्या है लाभ दोष परिभाषा | meaning of  double entry system

दोहरा लेखा प्रणाली को लेखे की पुस्तको मैं बिज़नेस लेन देन को लिखने की सर्वोतम तरीका माना जाता है क्युकी यह पूर्ण तथा वैज्ञानिक विधि है इसके निश्चित और स्पष्ट नियमो और सिधान्तो की वजह से अब यह विश्व स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा डबल एंट्री सिस्टम के अनुसार प्रत्येक बिज़नेस लेन देन कम से कम दो खातो को विपरीत दिशा यानि डेबिट और क्रेडिट मैं प्रभावित करता है 

दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धांत बताइए क्या है

प्रत्येक लेन देन मैं हमेशा दो पहलू होते है जिनमे से एक डेबिट किया जाता है तथा दुसरे को क्रेडिट किया जाता है उदाहरन के लिए लेनदारो को नकद भुगतान किया इस लेन देन का प्रभाव यह है की इससे बिज़नेस की रोकड़ तथा दायित्व दोनों कम हो जाते है

इसलिए इन लेन देन से दो खाते प्रभावित हुए एक खाते को डेबिट किया गया तथा दुसरे को क्रेडिट किया गया अत यह स्पष्ट है सभी लेन देन दो खातो को प्रभावित करते है और बिज़नेस मैं ऐसा कोई भी लेन देन नही है जो एक खाते को प्रभावित करता हो

दोहरा लेखा प्रणाली क्या है | meaning of  double entry system

दोहरा लेखा प्रणाली के जन्मदाता कौन है बताये

लेखाकन एक नया विषय नही है यह अभी हाल ही मैं उत्पन्न नही हुआ है . लेखाकन का इतिहाश सभ्यता की तरह पुराना है बेबीलोनिया तथा मिश्र को लेखाकन का जन्म स्थान माना जाता है

लेकिन उस समय लेखाकन एक स्वतंत्र विषय नही था बल्कि गणित का एक भाग था 1494 मैं एक फ्रंच यापरी लुकाश पसिओली ने एक पुस्तक लिखी जी गणित से सम्बधित थी 

लेकिन इस पुस्तक के एक भाग मैं बुसिनेस और पुस्त्पालन की जानकारी सम्मलित थी उसने अपनी पुस्तक मैं पहली बार आधारभूत शब्द डेबिट तथा क्रेडिट का प्रयोग किया इसके आधार पर उसे आधुनिक लेखाकन का पिता माना जाने लगा 1544 मैं ह्यूज ओउल्ड कैसिल ने इस पुस्तक का अंग्रेजी मैं अनुवाद किया इस पुस्तक को इंग्लैंड मैं प्रसिद्ध करने का श्रेया उसी को जाता है

इसके बाद से लोगो ने इस प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध करने की बहुत कोशिश की 1785 मैं एडवर्ड जोन्स की कोशिश कों अनदेखा नही किया जा सकता जिसने दो खानों के साथ रोजनामचा(JOURNL) बनाने की धारणा का जिक्र किया और अपनी पुस्तक बुक कीपिंग की अंग्रेजी प्रणाली ( English SYSTEM of BOOK KEEPING ) मैं तलपट (TRIAL BALANCE)के साथ सहायक बहियों की शुरुआता कि और आज के आधुनिक युग मैं इनके मत्वपूर्ण लक्षणों के कारण ही यह प्रणाली पुरे विश्व मैं अपनाई गयी

दोहरा लेखा प्रणाली का क्या अर्थ है बताये  (meaning of  double entry system )

दोहरा लेखा प्रणाली के अनुसार प्रत्येक बिज़नेस लेन देन को खाताबही मैं दो जगह पर लिखा जाता है – पहली बार एक खाते को डेबिट पक्ष मैं और दुसरे खाते को क्रेडिट पक्ष मैं यदि कोई वस्तु हमारे पा आती है ( comes in ) तो दुशरी दुशरी वस्तु हमारे पास से अवश्य जानी चाइये ( goes out ) उधाहरन के लिए हमने 25000 का भवन ख़रीदा तो इस लेन देन से दो खाते प्रभावित होते है

 एक भवन तथा दूशरा कैश इस लेन देन से हम भवन प्राप्त करते है और हमारे द्वारा कैश का भुगतान किया जाता है अत उपर्युक्त उधाह्र्ण मैं भवन खाता 25000 से डेबिट तथा कैश खाता 25000 से क्रेडिट होता है

उपरोक्त लेन देन को ध्यान मैं रखते हुए यह कहा जा सकता है की डबल एन्ट्री सिस्टम के अनुसार प्रत्येक लेन देन के दो पक्ष होते है एक पक्ष को लाभ हो रहा होता है 

तथा दूसरा पक्ष लाभ का त्याग कर रहा होता है और यह स्पष्ट है की प्रत्येक डेबिट के लिए क्रेडिट होता है और प्रत्येक क्रेडिट के लिए डेबिट होता है

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दोहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा कीजिए कौन कौन से है

जे आर बाटलीबाय के अनुसार प्रत्येक बुसिनेस या व्यवसाय मैं लेन देन का दोहरा या डबल प्रभाव होता है यह दो खातो को विपरीत यानी उलटे दिशा को प्रभावित करता है और जब भी किसी लेन देन का पूर्ण लेखा करना हो तो यह जरुरी होगा की एक खाते को डेबिट तथा दुसरे खाते को क्रेडिट किया जाये और प्रत्येक लेन देन के दोहरा प्रभाव के कारण ही इसे दोहरा लेखा प्रणाली कहा जाता है

विलियम पिकिल्स के अनुसार दोहरा लेखा प्रणाली मैं मद्रा या पैसे मैं व्यक्त प्रत्येक व्यवहार को दो तरीके से लिखा जाता है एक खाते मैं लाभ मिलता है और दुसरे खाते मैं लाभ को त्यागना होता है जिससे पहला खाते को डेबिट और त्यागने वाले खाते को हम क्रेडिट किया जाता है

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दोहरा लेखा प्रणाली के लाभ लिखिए कौन कौन से है

वैज्ञानिक पद्धति -यह वह पद्धति जिसमे कुछ सिधान्तो और नियमो पर आधारित है जिसे  लेखाकन की वैज्ञानिक पद्धति कहा जाता है

लेन देनो का पूरा लेखा करना – इस प्रणाली मैं लेन देन का पूरा लेखा किया जाता है जैसे वास्तविक खाता ,व्यक्तिगत खाता ,वास्तविक खाता और नाममात्र खातो का किया जाता है

लेखाकन की बदलने वाली प्रणाली – लेखाकन की प्रणाली परिवर्तशील है व्यवयसायिक संस्थाए इसे अपने आवश्यकताओ के अनुसार बदलते रहते है

तलपट को तैयार करना – इसकी मदद से हम trail बैलेंस या तलपट तैयार किया जाता है

अंतिम खाता तैयार करना – जब व्यवसायी की अत मैं लाभ हानि का पता करना होता है तो इसकी मदद से अंतिम खाते को तैयार किया जाता है

तुलनात्मक अध्ययन मैं सहायक – लेखाकन की दोहरा लेखा प्रणाली चालु साल के सभी खाते को और गत साल के खातो को मिलाने और अध्ययन करने मैं सहायता करता है

अशुद्धियो और छल कपटो को कम करना – इसमें सभी खातो का दो पक्ष होता है एक डेबिट और एक क्रेडिट होता है जिससे दोनों खातो का मिलान बराबर होता है इससे छल क्पठो की सभावना कम होता है

वैधानिक मान्यता – इस नियम को कम्पनी अधिनियम और अनेक अधिनियम से मान्यता प्राप्त है और सभी पूंजी वाली कम्पनी बैंकिंग और बीमा कम्पनी सभी इसे प्रणाली के अनुसार रखती है

सभी पक्षकारो को सूचनाओ प्रदान करना -इसी प्रणाली के अनुसार ही बहुत सी पुस्तको को बनायीं जाती है और ये पुस्तक व्यापार के हिट मैं रहकर बनायीं जाती है

सभी प्रकार के व्यवसायों के लिए उपयुक्त – लेखाकन की यह प्रणाली सभी प्रकार के व्यवसाय जैसे एकल व्यपार साझेदारी सहकारी समितिया और पूंजी युक्त कंपनिया बीमा कम्पनी बैंकिंग कंपनिया के लिए यह प्रणाली सही है इसलिए ये पुरे वर्ड मैं इस्तेमाल किया जाता है

दोहरा लेखा प्रणाली के दोष यानी कमी क्या है

महगा और मुश्किल पद्धति – दोहरा लेखा प्रणाली बहुत महगा और खर्चीला है क्युकी इसमें बहुत सारी पुस्तको को बनाया जाता है रोजनामचा ,खाताबही तलपट कैश बुक और इसके साथ इनके सहायक पुस्तके और इन सब को मेन्टेन करना काफी मुश्किल होता है और इन सभी पुस्तको को बनाने और कार्य करवाने मैं काफी खर्च आता है इसलिए ये पद्धति काफी मुश्किल और खर्चीला होता है

छोटे फर्म के लिए नही – ये पद्धति छोटे फर्म के लिए नही है क्युकी इसके बहुत सारी पुस्तको को बनाना पड़ता है और छोटे फर्म मैं इसकी जरुरुत नही होती है बड़े फर्म मैं ही इसकी जरुरुत पड़ती है

अधिक ज्ञान की जरूरत – इस पद्धति को बनाने और इसको करने के लिए अधिक ज्ञान की जरूरत होती है जो अकाउंट को अच्छे से समझ है वही इस प्रणाली को कर सकता है

अकाउंट की गलतियों -हम उन गलतियों को पता नही लगा सकते है जो हम ने पुस्तको मैं लिखना भूल गए है अगर हम ने कोई गलत एंट्री कर दी है तो भी इस प्रणाली से पता लगाना बहुत मुश्किल होता है

इस प्रणाली मैं जो आय से व्यय  होता है और पूंजी से व्यय होता है कभी हम आयगत व्यय को पूंजीगत व्यय मान लेते है और पूंजीगत व्यय को आयगत व्यय मान लेते है इसको पता लगाना मुश्किल होता है

जब हम एक खाते को सही करते है और दुसरा खाता गलत हो जाता है तो इस प्रकार की गलती को पता नही लगाया जा सकता है

निष्कर्ष – इस प्रणाली के बारे मैं जानने के बाद लगा है की यह प्रणाली इन दोषों के लिए जिमेदार नही है ये प्रणाली एक वैज्ञानिक प्रणाली है जो पुरे विश्व मैं इस्तेमाल किया जाता है

 

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