going concern concept | TYPES OF ACCOUNTING PRINCIPLES

अभी के युग मैं ,सभी बिज़नेस का संबध बहुत से कंपनी और यक्तियो से होता है जैसे लेनदार , बैंक , बीमा  कम्पनी , कर्मचारी , विनियोग कर्ता , कर विभाग , अंशधारी या सरकार . इसलिए बिज़नेस  सूचनाओ को गुप्त रखना असम्भव होता है

कंपनी अधिनियम के अनुसार कंपनियों को अपने अंतिम खातो को प्रकाशित करवाने अनिवार्य होता है , जब कम्पनी अंशो या ऋण पत्रों  को निर्मित करना चाहती है तो उसे अपनी वीतय कंडीशन तथा भविष्य की योजनाओ को समाचार पत्रों मैं प्रकाशित करवाना होता है 

एकाउंटिंग विवरण विभिन पक्षकारो के सामने बिज़नेस की लाभदायकता तथा वीतय शमता को प्रतुत करते है और ये आवश्यक है की ये विवरण एक प्रमाणित भाषा तथा कुछ निश्चित नियमो के आधार पर बनाये जाते है 

ये नियम एकाउंटिंग के सर्वमान्य नियम  कहलाते है इन नियमो को संसार के सभी देशो ने एकाउंटिंग के विवरण बनाने सामान्य दिशा निर्देश के रूप मैं स्वीकार कर लिया है 

एकाउंटिंग के इन नियमो का विकाश समय बीतते के साथ साथ हुआ है बिज़नेस के विस्तार के कारन लेखाकारों के सामने बहुत सारी कठिनाई आई और इन समस्या को हल करने के अनेक समाधान खोजे गए जब इन समाधानों को लेखाकारों ने सवीकार कर लिया तो ये समाधान नियम बन गए और इन्होने ही नियमो का रूप ले लिया 

 नियमो का अर्थ

एक सामान्य कानून या नियम जिसे कार्य के मार्गदर्शन , निर्धारित शेत्र या यवहार या प्रथा के आधार के लिए अपनाया गया हो नियम कहलाता है की अंत नियम शब्द का प्रयोग किसी क्रिया को अपनाने हेतु सामान्य कानून के किसी कार्य के लिए मार्गदर्शन के रूप मैं प्रयोग किया जाता है 

एकाउंटिंग नियमो से सबधित परिभाषाये इस प्रकार है 

 जॉन्सन के अनुसार – सामान्य बोलचाल मैं एकाउंटिंग की मान्यताये और नियम एकाउंटिंग के प्रकार और कार्यविधिया और एकाउंटिंग के  वास्तविक यवहार मैं इन नियमो तरीको तथा कार्यविधियो का प्रयोग ही एकाउंटिंग के नियम है 

  आर. एन . येथोनी . के अनुसार एकाउंटिंग के नियमो और परम्पराओ को ही नियम कहा जाता है

 अमेरिका की सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट संस्था के अनुसार नियम शब्द का प्रयोग कारवाई मैं मार्गदर्शन के रूप मैं स्वीकृत एक सामान्य कानून या नियम यवहार या कार्यप्रणाली के रूप मैं किया जाता है

 एकाउंटिंग नियमो की विशेषता ) 

इनके नियमो की विशेषता इस प्रकार है 

 Accounting Principles are Universal एकाउंटिंग नियम Universal ) एकाउंटिंग नियम universal है क्युकी ये नियम केवल एक अकाउंटेंट द्वारा प्रयोग नही किये जाते बल्कि विश्व के सभी लेखाकारों द्वारा इनका पालन किया जाता है 

एकाउंटिंग नियम सामान्य नियमो पर आधारित होते है

एकाउंटिंग के नियम सामान्य नियमो पर आधारित होते है ये नियम भोतिक और रसायनिक विज्ञानं की तरह पुर्न्य निश्चित नही होते और न ही ट्रेनिंग द्वारा इनकी जाच की जाती है इन नियमो की सामान्य स्वीकृत लेखाकारों द्वारा प्राप्त होती है इस स्वीकृत लेखाकारों द्वारा प्राप्त होती है इस स्वीकृत की सहायता से ही इनका विकास किया जाता है 

 एकाउंटिंग नियम तर्क तथा अनुभव द्वारा प्रतिपादित हुए है ( Accounting Principles Are Derived by argument and Experience ) एकाउंटिंग नियमो की न तो परप्रमाणित द्वारा जाच की जा सकती है और न ही किसी लिखित कानून द्वारा प्रतिपादित होते है इनका अनुवाद आवश्यकता अनुभव तथा तर्क द्वारा होता है आसपास का वातावरण भी इन नियमो के निर्माण पर प्रभाव डालता है और इन नियमो का निर्माण करते समय आसपास के सामाजिक , आर्थिक , भैतिक और राजनितिक वातावरण को ध्यान मैं रखना चाहिए 

TYPES OF ACCOUNTING PRINCIPLES( एकाउंटिंग नियमो के प्रकार ) 

एकाउंटिंग नियमो को भिन्न भिन्न नामो से जाना जाता है जैसे AVDHARNAYE ( CONCEPTS ) परिपाटिया ( CONVENTIONS) , मान्यताये ( ASSUMPTIONS) तथा स्वीकृत तथ्य (POSTULATES ) आदि एकाउंटिंग नियमो को निम्लिखित दो भागो मैं बाटा जा सकता है 

 बुनियादे या मान्यताए

 एकाउंटिंग नियम 

 Basic Concepts or Assumptions

योजना एक ऐसी मान्यता होती है जो सभी लोगो द्वारा स्वीकृत होती है तथा सब उसका पालन करते है कुछ मत्वपूर्ण मान्यताए इस प्रकार है 

चालु यवसाय की योजना ( going concern concept ) इस योजना के अनुसार यह माना जाता है की यवसाय लम्बे समय तक चलता रहेगा और निकट भविष्य मैं बंद नही होगा इस योजना के आधार पर स्तिथि विवरण मैं स्थायी asset का लेखा बाज़ार मूल्य पर न करके वास्तविक लागत मैं से हाश को घटाकर किया जाता है 

example के लिए एक मशीन रूपये 1600000 खरीदी गयी और इसका अनुमानित जीवन काल 8 वर्ष का है तो हर वर्ष का लाभ हानि ज्ञात करने के लिए इस लागत को 8 वर्षो मैं बाट दिया जायेगा . सम्पतियो को बाज़ार मूल्य पर इसलिए नही दिखाया जाता क्युकी सम्पतियो को यवसाय मैं इस्तेमाल किया जाना है 

न की इन्हे बाज़ार के मूल्यों पर बेचा जायेगा इसी योजना के अनुसार जब किसी विशेष मद पर किये गए खर्च का लाभ कई वर्षो तक मिलना हो तो ऐसे खर्चो को कई वर्षो मैं बाट दिया जायेगा और इन खर्चो को पूंजीगत खर्च  माना जायेगा 

 एकरूपता की योजना ( consistency concept) 

इस योजना के अनुसार यावसायिक लेन देनो का लेखा करने के लिए प्रत्येक वर्ष एक जैसी सिस्टम  का प्रयोग करना चाहिए ताकि विभिन्न वर्षो के लाभ हानि खाते और स्तिथि विवरण आपस मैं तुलना के योग्य हो सके . उधाहरण के लिए  अंतिम स्टोक का मूल्याकन करने स्थायी सम्पतियो पर  हाश लगाने तथा देनदारो पर संधिक्त पैसो के लिए प्रवधान बनाने की विभिन्न विधिया है 

लेकिन इस योजना के अनुसार एक ही प्रकार की पद्धति प्रयोग की जानी चाहिए ताकि एकरूपता बनी रहे . लेकिन एकरूपता के नियम का यह अर्थ नही है बिज़नेस की बदलती हुई कंडीशन मैं इसको change ना किया जाए क्युकी इस प्रकार तो खाते लोच् हिन् हो जायेगे . और यदि अकाउंटेंट यह समझता है की प्रचलित परम्परा मैं परिवर्तन करके बिज़नेस के लाभ हानि और फाइनेंसियल स्थिति को ज्यदा अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है तो उसे वर्तमान परम्परा मैं परिवर्तन कर देना चाहिए ऐसी दशा मैं कंडीशन विवरण ( trial बैलेंस ) बनाते समय किये गए change का उल्लेख कर देना चाहिए 

ACCURAL CONCEPT (कमाई  योजना ) 

कमाई योजना भी एक बुनियादी  योजना है जो एकाउंटिंग सूचनाओ की उपयोगिता मैं विरधी करती है लेखे की पुस्तको मैं सभी लेन देनो को इस योजना के अनुसार लिखा जाता है इसका अभिप्राय यह हुआ की लेखे की पुस्तको मैं बिज़नेस लेन देनो का लेखा उस समय किया जाता है जब वो होते है अथार्थ भुगतान RECIEPT या भुगतान करने के समय उनका लेखा नही किया जाता इसलिए बिक्री तथा खर्चो को एकाउंटिंग अवधि मैं ध्यान मैं रखा जाता है चाहे CASH प्राप्ति या भुगतान हुआ हो या नही 

एकाउंटिंग का कमाई  आधार खर्चो का एक एकाउंटिंग अवधि मैं कमायी गयी आगम से मिलान भी करता है इसलिए यह योजना मिलान नियम ( MACHING PRINCIPLE के समान मानी जाती है कमाई एकाउंटिंग को अधिकार कंपनियों द्वारा कुछ को छोडकर प्रमाणित एकाउंटिंग प्रथा माना जाता है यह योजना कम्पनी की चालू दशा का सही और स्पष्ट चित्र प्रतुत करती है

उधाहरण के लिए एक बिज़नेस बिजली के बिलो का उसी समय लेखा कर लेता है जैसे ही वो प्राप्त है क्युकी वह सेवोका लाभ उठा चूका होता है इसके अनुसार वह भुगतान की तिथि को धयान मैं नही रखता 

एकाउंटिंग नियम

बुनियादी  नियम मैं वो नियम शामिल है जो निश्चित होते है तथा जिसमे परिवर्तन नही किया जा सकता है इसका विवरण इस प्रकार है 

 बिज़नेस के आस्तित्व का नियम ( THE BUSINESS ENTITY PRINCIPLES) 

ये एकाउंटिंग का एक महत्वपूर्ण नियम है इस नियम के अनुसार बिज़नेस का आस्तित्व उसके स्वामियों से अलग माना जाता है अन्य शब्दों मैं बिज़नेस का आस्तित्व उसके स्वामियों से अलग माना जाता है अन्य शब्दों मैं बिज़नेस से अलग माना जाता है 

बिज़नेस की सभी पुस्तके जिसमे लेन देनो का लेखा किया जाता है स्वामी से अलग रखी जाती है सभी लेन देनो का लेखा फर्म के दिर्ष्टि कोण से किया जाता है बिज़नेस का लाभ हानि खाता बिनेस के लाभ हानि प्रकट करता है 

स्वामी के लाभ हानि को नही इसी प्रकार बिज़नेस का TRIAL BALANCE की वितया स्तिथि को दर्शाता है स्वामी को नही बिज़नेस के स्वामी को बिज़नेस का लेनदार तथा प्रबन्धक माना जाता है इसी आधार पर बिज़नेस के स्वामी को निवेश की गयी कैपिटल पर ब्याज दिया जाता है तथा बिज़नेस से निकाली गयी राशि पर ब्याज लिया जाता है प्रथक अस्तित्व के नियम के कारन स्वामी का मकान उसकी निजी कर उसकी यक्तित्व आयो तथा खर्चो को बिज़नेस से अलग रखा जा है 

इसी प्रकार यदि स्वामी के एक से अधिक बिज़नेस है तो इन सभी बिज़नेस के खातो को अलग अलग रखा जाता है यह नियम बिज़नेस संगठन की सभी प्रकारों पर लागू होता है जैसे एकल सजेदारी फर्म तथा उनकी कम्पनी आदि 

 

 मुद्रा माप नियम ( MONEY MEASUREMENT PRINCIPLE )

 इस नियम कर के अनुसार केवल उन्ही लें देनो को लेखे जी पुस्तको मैं लिखा जाता है जिन्हें मुद्रा के रूप मैं मापा जा सकता है उधाह्र्ण के लिए रूपये 260000 की एक मशीन खरीदी 450000 का एक कंप्यूटर बेचा गोपाल को 36000 का माल बेचा 

निष्कर्ष – आपको साधारण हिंदी मैं जानकारी देना ही हमारा मकसद है  

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