E-Invoice System क्या है | E-इनवॉइस को कैसे बनाया जाता है

E-Invoice System क्या है | E-इनवॉइस को  कैसे बनाया जाता है

E-Invoice System क्या है | E-इनवॉइस को कैसे बनाया जाता है

इ-इनवॉइस क्या है GST मैं Eइनवॉइस के बारे  मैं आपका जानना बहुत जरुरी है REGISTRATION E-Invoice

E-इनवॉइस क्या है

पहले नोटीफिक्शन 61 के अनुसार अगर आपकी टर्न ओवर 500 करोड़ से उपर है तो आप E-इनवॉइस के लिए एप्लीकेबल हो जाते है पर 10 नवम्बर 2020 ने एक नोटीफिक्शन और आई नोटीफिक्शन NN/88/2020 के अनुसार अगर आपकी टर्न ओवर 100 करोड़ से उपर है तो आप इसमें अप्प्लीकेबल हो जाते है आपको E इनवॉइस करनी ही पड़ेगी

 

अगर आपकी टर्न ओवर 2017-2018 , और 2018-19 और 19-20 मैं 100 करोड़ से उपर टर्न ओवर हो गया है तो आप E-इनवॉइस के लिए अप्प्लीकेबल हो जाते है आपको E इनवॉइस करनी ही पड़ेगी

 

अगर आपको एक प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी है आपकी टर्न ओवर 100 करोड़ से निचे है तो भी आप E-इनवॉइस नही कर सकते है जब टर्न ओवर 100 करोड़ से उपर होगी तभी आप E-इनवॉइस कर सकते है

कुछ पॉइंट जो आपको E-इनवॉइस के बारे मैं जानना चाहिए 

1 . अगर आप की टर्न ओवर 100 करोड़ से उपर है और आप किसी कारण से E-इनवॉइस नही करते है और नार्मल इनवॉइस आप बना देते है तो वो इनवॉइस को नही माना जायेगा GST सिस्टम के अनुसार वो इनवॉइस आप ने बनाया ही नही

2. अगर आप नार्मल इनवॉइस बना लेते है और E-इनवॉइस एक महीने बाद बनाते हो तो सामने वाला फर्म जो ITC उसी टाइम ले पायेगा जब आप E-इनवॉइस इशू करेगे

E-इनवॉइस मैं कुल पाच प्रकार के नोटीफिक्शन है 

68,69,70,71,72 

नोटीफिक्शन 68 क्या कहता है

ये कहता है की की जिसकी सेल 100 करोड़ रूपये से उपर है और B2B की सेल है उसको E-इनवॉइस करना है

नोटीफिक्शन 69 क्या है

इसमें आपको ये बताता है की ये E-इनवॉइस किस पोर्टल पर बनेगा ये बताता है E-इनवॉइस करने के लिए अलग से पोर्टल है इसके लिए 10 प्रकार के लिंक बनाये गए है ताकि ज्यदा लोड ना पड़े

ये लिंक इस प्रकार है www.einovice1.gst.govt.in इसमें आपको एक से लेकर 10 तक कोई भी नंबर डाल कर आप इसके अलग अलग साईट पर जा सकते हो अगर एक साईट पर लोड ज्यादा है तो आप दुसरे लिंक पर जा सकते हो

नोटीफिक्शन 70 क्या कहता है

इसमें ये बताया गया है अगर आपकी सेल B2B की है और 100 करोड़ से ज्यदा है तो आपको E-इनवॉइस बनाना होगा

नोटीफिक्शन 72 क्या है

इसको समझना आपको जरुरी है अगर आपकी B2B की सेल 100 करोड़ रूपये से अधिक है तो आपको E-इनवॉइस तो करना ही है पर अगर आपकी B2C की सेल 500 करोड़ से ज्यदा है तो आपको E-इनवॉइस तो बनेगा ही पर उस पर QR कोड भी होना चाइये जिससे पता चलेगा की आप ने किसको सेल किया है

 

पर इसके 1 अप्रैल 2021 से E-इनवॉइस मैं कुछ चेंज आ रहा है पर आपको जानना जरुरी है 

आपको बता दे की अब जो 100 करोड़ B2B की टर्म ओवर पर E-इनवॉइस लागू होता था पर 1 अप्रैल से ये 50 करोड़ रूपये हो जायेगे मतलब अगर आपकी सेल B2B की सेल 50 करोड़ टर्न ओवर पार कर लेते है तो आपको E-इनवॉइस बनाना पड़ेगा

और आपको हर बिल पर HSN कोड को डालना जरुरी हो जायेगा अगर किसी से सेल करते है या किसी से खरीदारी की है तो आपको HSN code को चेक कर लेना है

और आपको एक ख़ास बात का और ध्यान देना है की अगर आप ने एक आइटम मगवाय है उसका HSN code देखना है और वही आइटम आप ने कही और से मगवाय है उसका HSN code कुछ और है इसको भी ध्यान देना जरुरी है की HSN एक ही हो

 

अगर आप ने E इनवॉइस कर दिया है वो इनवॉइस जो है अपने आप आपकी GSTR1 मैं अपने आप आ जायेगा

आप ने E-इनवॉइस किया है तो उसका IRN नंबर इशू होता है तो आप उसी IRN नंबर को अपने नार्मल इनवॉइस मैं जरुर डाले

और ध्यान रहे अगर माल खरीदा है और उसकी टर्न ओवर E-इनवॉइस करने जितनी है तो आप उस बिल मैं चेक कर ले की उसमे IRN नंबर है या नही

ये कुछ अपडेट थे जो 1 अप्रैल 2021 से लागू हो सकते है 

निष्कर्ष – आशा करता हुई आप को E -इनवॉइस समझ आ गया होगा अगर कोई नई अपडेट आती है तो इसी E -इनवॉइस वाले आर्टिकल मैं आपको मिल जाएगी

 

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