डायरेक्ट टैक्स क्या है और प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं लाभ और हानि | प्रत्यक्ष कर के गुण और दोष

प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं प्रत्यक्ष कर के लाभ क्या है और दोष क्या है आज हम जानेगे जिसे हम डायरेक्ट टैक्स भी कहते है हम इसको डिटेल मैं समझेगे प्रत्यक्ष कर यानी डायरेक्ट टैक्स  क्या है प्रत्यक्ष कर ऐसे कर होते है जो किसी इंसान की होने वाली इनकम या आय पर लगाया है और उसकी सम्पति पर लगाया जाता है प्रत्यक्ष या डायरेक्ट टैक्स कर देने वाला के उपर ही कर का बोज होता है

प्रत्यक्ष कर के उदाहरण से समझते है

जैसे इनकम टैक्स ,प्रत्यक्ष कर का उदाहरण  प्रत्यक्ष कर या डायरेक्ट टैक्स ऐसे टैक्स है जो करदाता पर डायरेक्ट लगाया जाता है इसलिए हम इसे डायरेक्ट टैक्स या प्रत्यक्ष कर कहते है जिससे ये टैक्स लिया जाता है ये उसी इंसान को देना होता है किसी अन्य इंसान को नही दे सकते है

भारत मैं सभी प्रत्यक्ष कर या डायरेक्ट टैक्स केंदीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT ) द्वारा किया जाता है

डायरेक्ट टैक्स क्या है और प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं लाभ और हानि | प्रत्यक्ष कर के गुण और दोष

प्रत्यक्ष कर के लाभ, प्रत्यक्ष कर के  गुण क्या है

हम आपकों 5 लाभ या गुण क्या है लिखिए

पता होना की कितना टैक्स जमा होना है – प्रत्यक्ष करो मैं आपको पता होता है की आपको कितना टैक्स को जमा करना है और कितने रूपये का टैक्स जमा करना है या भुगतान करना है या सरकार को कितने का टैक्स जमा करना है

आय के साथ आपके टैक्स मैं बदोतरी होना – प्रत्यक्ष टैक्स या डायरेक्ट टैक्स जो है वो आपकी आय मैं बदोतरी होगी तो आपके टैक्स मैं बदोतरी होगी अगर सरकार चाहे तो टैक्स की दरे को बढ़ाकर अपने REVENUE को बढ़ा सकते है

सभी के लिए समान टैक्स – ये टैक्स सभी के लिए एक समान होते है ये टैक्स अमीर को अधिक देना होता है और ये टैक्स समाजिक न्याय को बनाये रखता है

inflation या मुद्रास्फीति – प्रत्यक्ष कर या डायरेक्ट टैक्स इन्फ्लेशन या मुद्रास्फीति को कण्ट्रोल करता है सरकार कभी भी कर की दर को बढ़ा सकते है और कभी भी कम कर सकती है जिससे इन्फ्लेशन को कण्ट्रोल किया जाता है

एकोनिमिकल – प्रत्येक कर मैं सरकार और टैक्स करदाता के बीच को नही है

प्रत्यक्ष कर के दोष या हानि क्या है

ये कर पोपुलर नही होना – इस टैक्स का भुगतान एक साथ किया जाता है इसलिए ये ज्यदा पोपुलर नही है

मनमानी टैक्स – इसमें जो टैक्स की दर सरकार द्वारा तय किया जाता है वही माननी पडती है

टैक्स की चोरी – इसमें टैक्स की चोरी की सम्भावना होती है

टैक्स करदाता का कम होना – भारत मैं जितनी जनसख्या है उसका बहुत ही छोटा भाग इस टैक्स का भुगतान करता है

 

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