explain the statement cash book is a journalised ledger

explain the statement cash book is a journalised ledger

रोकड़ बही एक जर्नल के रूप मैं खाताबही है ( CASH BOOK IS A JOURNALISED LEDGER) 

कई बार हमारे दिमाग मैं यह question आता है की रोकड़ बही एक जर्नल है या खाताबही  है यह एक जर्नल इसलिए है क्युकी सभी नकद लेन देनो का लेखा नरेशन के साथ रोकड़ बही ( कैश बुक ) मैं किया जाता है और इसके बाद इनकी पोस्टिंग खाताबही मैं सम्बधित खातो मैं की जाती है 

 

रोकड़ बही एक खाता बही इसलिए है क्युकी यह रोकड़ खाते और बैंक खाते ( तीन खाने वाली रोकड़ बही मैं ) का कार्य भी करती है खाता बही मैं अलग से कोई रोकड़ खाता नही बनाया जाता है जब रोकड़ बही बनायीं हुई हो अत रोकड़ बही जर्नल और खाताबही का एक अनोखा जोड़ है अत यह जर्नल के रूप मैं खाताबही जानी जाती है

रोकड़बही और जर्नल मैं समानताये ( similarities of cash book with journal ) 

 

1. उत्पति के समय सभी नकद लेन देन रोकड़ भी अथार्थ पराभिक पुस्तक मैं लिखे जाते है 

2. लेन देन date के अनुसार लिखे जाते है 

 

3 . रोकड़ बही से लेन देनो की पोस्टिंग खाता बही मैं सम्बधित ( रोकड़ खाते को छोडकर ) की जाती है 

 

4 . जर्नल की तरह रोकड़ बही मैं खाता बही पेज संख्या ( ledger folio ) का खाना भी होता है 

 

5 . प्रत्येक entry पर नरेशन दिया जाता है 

 

रोकड़ बही और खाताबही मैं समानताये ( similarities of cash book with ledger ) 

 

1 . रोकड़ भी का प्रारूप ( format ) खाताबही के खाते से मेल खाता है इसके दो पक्ष होते है बाया पक्ष डेबिट साइड होता है तथा दाया पक्ष क्रेडिट पक्ष होता है 

2 . खाताबही की तरह इसमें भी शब्दों ( TO ) तथा ( BY ) का प्रयोग किया जाता है 

3 . खाताबही मैं अलग से कोई रोकड़ खाता तथा बैंक खाता नही खोला जाता है अत नकद और बैंक व्यवहारों के लिए रोकड़ बही की अंतिम पोस्टिंग की पुस्तक होती है 

4 . अन्य खातो की तरह , रोकड़ बही के रोकड़ और बैंक खानों का समय समय पर शेष निकला जाता है 

 

रोकड़ बही के लाभ ( Advantages of cash book ) 

रोकड़ बही के लाभ इस प्रकार है 

1 . यह नकद लेन -देन को जर्नल मैं लिखने और उसी की खाताबही मैं पोस्टिंग करने के कार्य के दोहराव ( dublication ) को रोकती है 

2 . नकद और बैंक व्यवहारों को रोकड़ बही मैं लिखा जा सकता है 

3. प्रतिदिन रोकड़ और बैंक शेष जानना सम्भव है  

4 . रोकड़ बही शुरुआत की पुस्तक के साथ -साथ खाताबही का कार्य भी करती है 

5 . नकदी से सम्बधित कपट कम हो जाते है और जहा किये जाते है और शुरुआत अवस्था मैं ही पकड़े जाते है 

रोकड़ बही की विभिन्न प्रकारे ( different types of cash book )  

1. एक खाने वाली रोकड़ बही
2 .
दो खाने वाली रोकड़ बही
3.
तीन खाने वाली रोकड़ बही
4.
लघु रोकड़ बही 

1 . एक खाने वाली रोकड़ बही ( single column cash book )   

यह रोकड़ बही ( cash book ) का सबसे सरल format है इसलिए इसे साधारण रोकड़ बही भी कहा जाता है समान्यता छोटे व्यापारी इस रोकड़ बही का प्रयोग करते है केवल नकद लेन देन और नकद प्राप्तियो और भुगतान इसमें लिखे जाते है इस रोकड़ बही के दो पक्ष होते है इसका बाया पक्ष या डेबिट पक्ष प्राप्ति पक्ष कहलाता है तथा दाया पक्ष भुगतान पक्ष कहलाता है इसके प्रत्येक पक्ष मैं राशी के लिए केवल एक ही खाना होता है 

 

                                                single column cash book

 

date

Particular

L.F

AMOUNT

DATE

PARTICULAR

L.F

AMOUNT

(1)

2. TO….A/c

(3)

(4)

(1)

(2) TO….A/c

(3)

(4)

 

1 . तिथि ( DATE ) इस खाने मैं वह तिथि लिखी जाती ही जिस लेन देन ( भुगतान या प्राप्ति ) होता है 

2. विवरण ( PARTICULAR ) इस खाने मैं उस खाते का नाम लिखा जाता है जिसकी सहायता से नकद लेन देन हुआ है सभी प्राप्तिया इसके नाम पक्ष ( डेबिट साइड ) तथा सभी भुगतान इसके जमा पक्ष ( क्रेडिट साइड ) मैं लिखे जाते है नकद लेन देनो को क्रमश डेबिट और क्रेडिट पक्ष लिखने के लिए शब्दों  TO और BY का इस्तेमाल किया जाता है 

3  .खाताबही पेज नंबर ( LEDGER folio) इस खाने मैं खाताबही की वह पेज संख्या लिखी जाती है जहा पर पोस्टिंग की गयी है 

. राशि ( AMOUNT ) इस खाने मैं सम्बधित लेन देनो की राशी लिखी जाती है 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *