लेखा मानक क्या है? | ACCOUNTING STANDARD MEANING IN HINDI SOLUTION

ACCOUNTING STANDARD फाइनेंसियल स्टेटमेंट के स्टेटमेंट  होते है जो व्यसाय की फाइनेंसियल सिचुएशन  को प्रस्तुत करते है फाइनेंसियल स्टेटमेंट   मैं स्थिति स्टेटमेंट  या लाभ हानि खाता सम्मलित होते है . इन उल्लेख  का मुख्य उद्देश्य सस्था से जुड़े विभिन्न पक्षकारो जैसे अंशधारी , रीनधारी , कर्मचारी , लेनदार ग्राहक तथा सरकार को सुचनाये प्रदान करना है . किसी भी संगठन के फाइनेंसियल स्टेटमेंट को उस संगठन की सच्ची और सही स्थिति प्रस्तुत करनी चाहिए . 

लेखा मानक क्या है? | ACCOUNTING STANDARD MEANING IN HINDI SOLUTION Is The Only Skill You Really Need

लेकिन  सच्ची और सही स्थति का अर्थ कम्पनी अधिनियम 1956 या किसी अन्य अधिनियम मैं परिभाषित नही किया गया है विभिन्न व्यावसायिक यूनिट के फाइनेंसियल स्टेटमेंट   मैं तुलनात्मकता तथा एकरूपता लाने के लिए लेखाकन  की योजना  ( CONCEPTS ) तथा परिपाटियो ( CONVENTIONS ) अथार्थ लेखाकन  के सर्वमान्य नियम   ( जिन्हें GAPP भी कहा जाता है ) को लेखाकन संघ द्वारा निर्मित किया गया है 

लेकिन कटीनाई  यह है की GAAP के अनुसार एक निश्चित मद को हल करने के लिए बहुत से विकल्प दिए हुए है इस स्थति मैं विभन्न फर्म इस प्रकार की मदों को हल करने के लिए विभन्न विधियों का प्रयोग करती है .

परिणाम स्वरूप फाइनेंसियल स्टेटमेंट   की विश्व सनीयता  स्थिरता एकरूपता तथा तुल्नाम्कता कम होती है अत लेखा कन की ऐसी नीतियों की अति आवश्यकता है जिनकी सहायता से फाइनेंसियल स्टेटमेंट   को अनुरूप और प्रमाणित बनाया जा सके उपयुक्त कटी नाइयो का मिकबला करने के लिए फाइनेंसियल स्टेटमेंट बनाते समय कुछ प्रमाणित नीतियों को अपनाया जाना चाहिए 

खाते व्यासायिक उपक्रम की सच्ची और सही स्थिति प्रकट करे इस उद्देश्य के लिए 29 जून 1973 के एक लेखाकन  संघ की स्थापना की गयी जिसे अंतर राष्टीय  लेखाकन  प्रमाप समिति ( INTERNATIONAL ACCOUNTING STANDARS CONMMITTE या IASC ) कहा जाता है ( वर्तमान मैं इसे अंतर राष्टीय लेखाकन  रिपोर्टिंग बोर्ड कहा जाता है ) 

इस संघ का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्टीय प्रमापो    के अनुसार प्रमापो को प्रकाशित करना है फाइनेंसियल स्टेटमेंट   को प्रस्तुत करने के यह लेखाकन  प्र्मापो और रितीयो को सुधारने का कार्य भी करती है INSTITUTE आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ india तथा institute आफ सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट इस समीति ( IASC ) के सदस्य है institute आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ india ( ICAI ) भी अंतर राष्टीय प्र्मापो के अनुसार लेखाकन  प्रमाप बनाता है  और उनको संशोधित करता रहता गई ताकि उन्हें भारतीय दशाओ के अनुसार लागू किया जा सके

 

लेखाकन  प्र्मापो की परिभाषा –

( DEFINITION OF ACCOUNTING STANDARDS)

ACCOUNTING STANDARD को विभिन्न लेखाकन  संस्थाओ द्वारा समय समय पर जारी किये गए लिखित उल्लेख  के रूप मैं परिभाषित किया जा सकता है जिनमे फाइनेंसियल स्टेटमेंट   को बनाने के लिए एक ही तरह के नियमो को निश्चित किया गया है 

कोलहर के अनुसार  लेखाकन  प्रमाप व्यहार का एक माध्यम है जो पेशेवर संस्थाओ परम्पराओ व् अधिनियम द्वारा लेखापलको पर लागू किया जाता है 

लेखाकन  प्र्मापो की विशेषताए ( ACCOUNTING STANDARDS) 

1. लेखाकन  प्रमाप लेखाकन  नीतियों और लेन देनो की कसोटी को निर्धारित करते है ये नियम और मार्गदर्शक प्रदान करते है ताकि व्यसाय के फाइनेंसियल स्टेटमेंट   मैं व्यावसायिक लेन देनो और घटनाओ का लेखा इसके अनुसार लेखा किया जा सके 

2 . ACCOUNTING STANDARD एक या एक से अधिक समस्याओ को हल करने के लिए उपलब्ध विधियों मैं से सबसे उपयुक्त विधि का निर्धारण करते है 

3 . ACCOUNTING STANDARD फाइनेंसियल स्टेटमेंट   का प्रयोग करने वाले विभिन्न पक्षकारो को सूचनाये प्रदान करते है 

4 , ACCOUNTING STANDARD लेखाकन  कार्यो मैं समरूपता प्रदान करते है . ये भिन्न भिन्न नीतियों और लेन देनो को अपनाने से होने वाले प्रभावों को दूर करते है  

लेखाकन  प्र्मापो की उपयोगिता या लाभ ( UTILITY OR ADVANTAGES OF ACCOUNTING STANDARS) 

ACCOUNTING STANDARD लेखाकन  कार्य से सम्बधित ऐसी नीतियों का निर्धारित करते है जो व्यसाय के लिए सबसे उपयुक्त हो तथा लेखाकारों को निर्णय लेने मैं सहायक करती हो ये लेखाकन  कार्य मैं एकरूपता लाते है एक रूपता की सहायता से फाइनेंसियल स्टेटमेंट   मैं तुलनात्मकअध्ययन किया जा सकता है इसके लाभ निम्न प्रकार है 

एकरूपता ( UNIFORMITY ) 

ACCOUNTING STANDARD लेखाकन  कार्य से सम्धित नीतियों और सीमओं का निर्धारण करते है  ये फाइनेंसियल स्टेटमेंट   मैं एकरूपता प्रदान करते है एक रूपता लेखाकन  प्र्मापो की उपयोगिता को बड़ा देती है 

फाइनेंसियल स्टेटमेंट   को तुलनात्मक बनाना ( TO MAKE THE FINANACIALSTATEMENTCOMPARATIVE )

लेखाकन  प्रमाप नियमो और नीतियों की एकरूपता के कारन फाइनेंसियल स्टेटमेंट   को तुलनात्मक बनाते है यदि लेखाकन  प्र्मापो का प्रयोग नही किया जाता तो भिन्न भिन्न प्रमाप भिन्न भिन्न नियमो का निर्धारण करते है इस कारन विभिन्न संस्थानों का तुलनात्मक अध्ययन सम्भव नही होगा 

फाइनेंसियल स्टेटमेंट   का तुलनात्मक अध्ययन करने से अनेक तथ्य प्रकट होते है जो यावसायिक उपक्रम से जुड़े हुए विभेन्न पक्षकारो के लिए बहुत उपयोगी होते है लेखाकन  प्र्मापो की गैर मौजिदगी मैं लेखाकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की रीतिया अपनाई जाती है जिस कारण फाइनेंसियल स्टेटमेंट   की तुलना नही की जा सकती 

 विनियोग्क्ताओ के लिए निर्णय लेने मैं सहायक ( HELPFULL IN DECISION MAKEING FOR INVESTOR)  

जो फाइनेंसियल स्टेटमेंट लेखाकन  प्र्मापो के आधार पर तैयार किये जाते है ये कम्पनी की सशी वितीय स्थति को प्रकट करते है इन उल्लेख  के आधार पर विनियोग सम्धित उचित निर्णय ले सकते है

फाइनेंसियल स्टेटमेंट   की विश्व सनीयता  और प्रमाणिकता मैं वर्धि ( INCREASE IN RELIABILITY AND CREDITABILITY OF FINANCIAL STATEMENTS ) 

यापार से सम्बद्ध रखने वाले विभिन्न पक्षकार जैसे – कर्मचारी , अंशधारी , प्रम्बध्क , सरकार आदि यह चाहते है की फाइनेंसियल स्टेटमेंट   को सच्ची तथ सही स्थति प्रकट करनी चाइये . ये केवल तभी सम्भव है जब इन उल्लेख  को कुछ निश्चित सिधान्तो और नियमो के आधार पर बनाया गया हो 

लेखाकन  प्र्मापो के आधार पर बनाये गए फाइनेंसियल स्टेटमेंट विभिन्न पक्षकारो के दिमाग मैं विश्वाश पैदा करते है की फाइनेंसियल स्टेटमेंट यवसाय की वास्तविक स्थिति प्रकट करते है 

 सरकार के लिए सहायक ( HELPFUL TO GOVERMENT ) 

-ACCOUNTING STANDARD के आधार पर बनाये गए फाइनेंसियल स्टेटमेंट यवसाय की वास्तविक स्थति को प्रस्तुत करते है ये स्टेटमेंट  सरकार द्वारा भिन्न भिन्न उदेश्यों के लिए प्रयोग किये जाते जा सकते है जैसे आर्थिक नियोजन अनुस्न्साधं और बाज़ार विश्लेष्ण आदि 

अन्केशेक  के लिए सहायक ( HELPFUL AUDITORS) : 

यह निश्चित करना ऑडिटर्स का कर्तव्य है की फाइनेंसियल स्टेटमेंट तैयार करते समय लेखाकन  प्र्मापो का पालन किया गया है यदि कोई संस्था अपने फाइनेंसियल स्टेटमेंट लेखाकन  सिधान्तो के अनुसार नही बनाती है तब भी ऑडिटर्स का कर्तव्य है की वो इस बात को अपनी रिपोर्ट मैं लिखे . 

उनका यह कर्तव्य है की लेखे की पुस्तको मैं किसी प्रकार के अंतर या कमी ( DISCREPANCY) की दिशा मैं फाइनेंसियल स्टेटमेंट के विभिन्न उपयोगकर्ताओ को सचेत करे . परिणाम स्वरूप ऑडिटर्स कम्पनी अधिनियम , 1956 के विभिन्न दंडनीय प्रवधानो के अंतर्गत स्वतंत्र होगे 

 कपटो और हेराफेरी को रोकने मैं सहायक ( HELPFULL IN PREVENTING FRAUDS AND MANIPULATIONS ) 

प्रत्येक यावसायिक इकाई को ACCOUNTING STANDARD का पालन करना होता है जिन पर ये लागू होते है और इनके लिए यह भी आवश्यक है की वो अपने फाइनेंसियल स्टेटमेंट इनके अनुसार तैयार करे . इस प्रकार की प्रक्रिया खातो मैं किसी भिप्रकर के कपट तथा हेराफेरी को कम करने मैं सहायक करती है 

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